34 साल से IIT का सपना हो रहा सच, बिहार का ये गांव बना इंजीनियर्स की फैक्ट्री, JEE क्रैक करते हैं दर्जनों बच्चे

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पटवा टोली, गयाजी को बिहार का आईआईटियन विलेज कहा जाता है. इस साल यहां से 12 छात्र आईआईटी में चयनित हुए हैं. ‘वृक्ष-बी द चेंज’ संस्था ने अहम भूमिका निभाई है.

हाइलाइट्स

  • पटवा टोली से 12 छात्रों का आईआईटी के लिए हुआ चयन
  • पटवा टोली को कहा जाता है बिहार का आईआईटियन विलेज
  • ‘वृक्ष-बी द चेंज’ संस्था में नि:शुल्क होती है इंजीनियरिंग की तैयारी

गयाजी. गयाजी जिले के पटवा टोली को बिहार का आईआईटियन विलेज कहा जाता है. यहां हर साल बड़ी संख्या में छात्रों का चयन आईआईटी के लिए होता है. इस साल पटवा टोली से 12 छात्रों का चयन आईआईटी के लिए हुआ है. अब लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि हर साल इस गांव से इतनी संख्या में छात्रों का चयन आईआईटी के लिए कैसे होता है? बता दें कि पिछले 34 साल से यहां के बच्चे नाम कर रहे हैं. ये सफर 1991 में शुरू हुआ था.

मैनचेस्टर आफ बिहार

दरअसल पटवा टोली गांव मानपुर प्रखंड क्षेत्र में स्थित है और एक दौर में इस जगह को मैनचेस्टर आफ बिहार के नाम से भी जाना जाता था. यहां बड़े पैमाने पर वस्त्र उद्योग लगे हुए हैं. यहां आज भी 10 हजार से अधिक पावरलुम और 300 से अधिक हैंडलूम प्रतिदिन संचालित होते हैं. यहां मुख्य रूप से धोती, गमछा, बेड शीट, साड़ी आदि का निर्माण होता है और देश के कई राज्यों में भेजी जाती है. जब यहां पावर लूम चलती है तो पावर लूम के खटखट के आवाज के बीच सब कुछ खो जाता है.

1991 से शुरू हुआ आईआईटी का सिलसिला
वर्ष 1991 में पहली बार इस गांव से जितेंद्र प्रसाद नाम के छात्र का चयन आईआईटी के लिए हुआ था. उसके बाद से गांव के छात्रों में इंजीनियरिंग या आईआईटियन के प्रति रुचि बढ़ने लगी. उसके बाद हर साल कुछ न कुछ छात्रों का चयन आईआईटी में होने लगा. यहां के बच्चों के सफलता के पीछे एक वजह यह माना जाता है कि जो भी छात्र यहां से आईआईटी या एनआईटी कॉलेज में जाते हैं वह जब भी छुट्टियों में घर आते हैं तो वह अपना पूरा समय पटवा टोली के भाई-बहनों को देते हैं. इसके अलावे पहले के छात्र एक जगह समूह में बैठकर तैयारी करते थे.

सफल छात्र आकर कराते हैं पढ़ाई

आईआईटियन की संख्या में वृद्धि और हुई जब यहां ‘वृक्ष-बी द चेंज’ संस्था खुला. यहां बच्चों के लिए नि:शुल्क इंजीनियरिंग की तैयारी शुरू की गई. पहले पटवा टोली के बच्चे जो जैसे-तैसे अपने घर में पावरलूम के आवाज के बीच पढ़ाई कर आईआईटियन बने अब उनके जूनियर भाई-बहनों को वृक्ष बी द चेंज संस्था में जगह मिली जहां शांतिपूर्ण माहौल में बच्चे एक साथ बैठकर आईआईटी की तैयारी करने लगे. इस संस्था में बच्चों को ई-लाइब्रेरी मॉडल दिया गया जहां बच्चे खुद बैठकर तैयारी करने लगे. जरूरत पड़ने पर यहां से निकले सीनियर अपने जूनियर बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं.

मार्गदर्शन से सफलता तक का सफर
अभी राज्य तथा देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज में गर्मी की छुट्टी चल रही है जिस वजह से पटवा टोली के भी कई इंजीनियरिंग के छात्र अपने घर आए हुए हैं. यह छात्र जूनियर बच्चों को मार्गदर्शन के लिए वृक्ष बी द चेंज संस्था पहुंचकर जूनियर बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं तथा वैसे कठिन सवाल जिसे बच्चे हल नहीं कर पाते उन्हें सीनियर के द्वारा गाइड किया जाता है. एनआईटी कॉलेज के दो सीनियर छात्र रूपम कुमार और सूरज कुमार इन दिनों छुट्टियों में जूनियर बच्चों का मार्गदर्शन कर रहे हैं. यह दोनों छात्र भी इसी संस्था से पढ़कर इंजीनियरिंग कॉलेज तक पहुंचे हैं.

घरआजीविका

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