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पश्चिम चम्पारण के वीटीआर और उदयपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में विदेशी पक्षियों का झुंड पहुंच गया है. वीटीरआ में साइबेरियन समेत 45 प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां अक्टूबर से फरवरी तक डेरा डालती हैं. ये पक्षी हजारों मील दूर यहां क्यों आते हैं, जानते हैं.
पश्चिम चम्पारण जिले के कुछ खास क्षेत्रों में विदेशी पक्षियों का कलरव गूंजने लगा है. कलरव को सुनकर पर्यटक यह महसूस करने लगे हैं कि अब सर्दियों ने दस्तक दे दी है. झील और जलाशयों में इन प्रवासी पक्षियों का डुबकी लगाना सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है.

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रवासी पक्षियों का झुंड वीटीआर की सुंदरता में चार चांद लगा रहा है.अधिकारियों की मानें तो, गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही साइबेरियन पक्षियों का झुंड हजारों मील का सफर तय कर बिहार के वाल्मिकी टाइगर रिज़र्व और उदयपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का रुख करता है.

इन नन्हे और खूबसूरत मेहमानों की हिफाजत के लिए वन विभाग भी अपनी भूमिका बखूबी निभाता है. इस वर्ष भी अक्टूबर के मध्य में सरैयामन सहित जिले के दूसरे वनवर्ती क्षेत्रों में साइबेरियन पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की जाने लगी है.

2024 के शुरुआती महीने में हुए एशियन वॉटरबर्ड सेंसस में ये पाया गया कि, जिले के कुछ खास क्षेत्रों में प्रवासी और दुर्लभ पक्षियों का बसेरा है. इनमें उदयपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, गंडक का फ्लड प्लेन क्षेत्र, बगहा-2 प्रखंड का दारूवाबरी क्षेत्र और मझौलिया प्रखंड का लाल सरैया क्षेत्र शामिल है.

मजे की बात यह है कि इन क्षेत्रों में पक्षियों की करीब 300 से अधिक प्रजातियां निवास करती हैं. लेकिन बात अगर साइबेरियन सहित दूसरे प्रवासी पक्षियों की कि जाए तो जिले में इनकी करीब 45 प्रजातियां दर्ज की गई हैं.

जानकार बताते हैं कि अक्टूबर में इन प्रवासी पक्षियों का यहां आना शुरू हो जाता है, जो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक चलता है. इसके बाद यह पक्षी फरवरी तक यहां रहते हैं. गौर करने वाली बात यह है कि प्रवास पर आने वाले ज्यादातर पक्षी अपने जोड़े के साथ यहां आते हैं.

शीतकाल में पक्षियों के यह जोड़े यहां अपने वंश की वृद्धि करते हैं और मार्च में अपने परिवार के साथ पुनः वापस लौट जाते हैं. यहां इन परिंदों का मुख्य आहार नदी की मछलियां, जलीय जीव और आस-पास के खेतों में लगे अनाज होते हैं.

बता दें कि साइबेरिया में पड़ने वाली भीषण ठंड की वजह से वहां इन परिंदों के सामने भोजन का संकट उत्पन्न हो जाता है. ऐसे में इन पक्षियों का रुख गर्म प्रदेशों की ओर होता है. चुंकि साइबेरिया की तुलना में भारत एक गर्म प्रदेश है, इसलिए इन पक्षियों का रुख भी भारत की तरफ ही होता है.