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oyster mushroom cultivation: छोटी सी जगह में शुरू की जाने वाली इस खेती में 50 हजार रुपये की लागत में लाखों रुपये कमा सकते हैं. इसकी बिक्री 150-200 रुपये प्रति किलो से लेकर इससे अधिक होती है.
बरसात में शुरू करें यह कारोबार
बताते चलें कि बगहा अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले कई प्रखंडों में महिलाएं समूह बनाकर मशरूम उत्पादन का कार्य कर रही हैं. ये महिलाएं जंगल के क़रीब रहती हैं. इनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ठीक नहीं है. पति का हांथ बटाने और अपने परिवार के भरण पोषण के लिए उन्होंने कमाई का कुछ ऐसा तरीका निकाला जिसे आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति भी अपनाने लगे हैं. वर्तमान में बरसात का मौसम है और हम आपको जिस खेती के बारे में बताने जा रहे हैं उसके लिए यह उत्तम समय है.
मशरूम उत्पादन के इस कार्य में महिलाओं ने सबसे पहले अपने लीडर का चुनाव किया और फिर बेकार पड़ी ज़मीन पर बांस और फूस से बनी एक झोपड़ी को तैयार किया. इतना करने के बाद सरकार की बागवानी योजना का लाभ लेते हुए उन्होंने बेहद सस्ती दरों पर ओएस्टर मशरूम के सैकड़ों बैग्स लिए, जिसका उत्पादन उसी मड़ई में ही शुरू किया गया.
बाज़ार में खूब होती है डिमांड
महिलाओं की लीडर में से एक सुमन देवी बताती हैं कि उन्होंने मशरूम उत्पादन का विस्तृत प्रशिक्षण लिया है. उन्हें इस बात की जानकारी है कि मशरूम के उत्पादन के लिए स्पॉन से भरे बैग्स को किस तापमान में रखा जाता है और कितने दिनों में उनका उत्पादन शुरू हो जाता है. ऐसे में बेहतर देख भाल से जब बैग्स में मशरूम का उत्पादन सफलता पूर्वक होने लगता है तब वो इसे स्थानीय बाज़ार में 150 से 200 रूपए प्रति किलो की भाव से बेचना शुरू कर देती हैं.
कुछ समय के बाद महिलाओं ने सरकार की स्कीम को छोड़ निजी रूप से मशरूम उत्पादन का काम शुरू कर दिया. आंकड़ों से समझें तो 10 किलो के एक बैग से कम से कम 7 किलो तक मशरूम का उत्पादन हो जाता है. घर से बेचने पर भी व्यापारी 150 रुपए प्रति किलो से अधिक का भाव देकर इसकी खरीदारी कर लेते हैं. इस हिसाब से झोपडी में रखे गए 150 बैग से लगभग 1,000 से 1,200 किलो मशरूम का उत्पादन होता है. इसकी बिक्री पर उन्हें ढाई लाख रूपए से ऊपर की आमदनी तीन से चार महीने में ही हो जाती है.
50 हजार लगाकर सालाना 7 लाख की कमाई
महिलाओं की मानें तो झोपड़ी में शुरू किए गए इस कार्य में सालाना 50 हजार रूपए तक का खर्च आता है. इससे प्रति वर्ष 7 लाख रुपए तक की आमदनी संभव हो पाती है. यदि आप मशरूम का चूर्ण बनाकर उसे बेचते हैं तो बाजार में उसकी बिक्री 400 रुपए प्रति किलो तक के भाव से की जा सकती है. मुश्किल से मिलने की वजह से स्थानीय होटल और रेस्टोरेंट वाले इसकी खरीदारी बड़ी मात्रा में करते हैं.