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Heart Surgery: जोधपुर में ब्लू बेबीज शिशुओं की हो सकेगी हार्ट सर्जरी, एम्स जोधपुर में सफल ऑपरेशन, 1000 में से 10 बच्चों को होती है ये समस्या

Heart Surgery: जोधपुर में ब्लू बेबीज शिशुओं की हो सकेगी हार्ट सर्जरी, एम्स जोधपुर में सफल ऑपरेशन, 1000 में से 10 बच्चों को होती है ये समस्या
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आखरी अपडेट:

Complex Heart Surgery: एम्स जोधपुर के हृदय रोग विभाग ने जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे दो शिशुओं की जटिल हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक की. सर्जरी की अगुवाई डॉ. अनुपम दास और डॉ. प्रमोद चंदोलिया ने की.

एम्स जोधपुर

हाइलाइट्स

  • एम्स जोधपुर में दो शिशुओं की जटिल हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई.
  • सर्जरी की अगुवाई डॉ. अनुपम दास और डॉ. प्रमोद चंदोलिया ने की.
  • ब्लू बेबीज बीमारी 1000 में से 10 बच्चों में होती है.

जोधपुर. एम्स जोधपुर के हृदय रोग विभाग (कार्डियोथोरासिकऔर वैस्कुलर सर्जरी) ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे दो शिशुओं की जटिल हार्ट सर्जरी की. इसमें से एक शिशु छह महीना का था, जिसका ट्रकस रिपेयर किया गया. पांच महीने के दूसरे शिशु का आर्टेरियल स्विच ऑपरेशन किया गया. ये दोनों सर्जरी जन्मजात हृदय दोषों के इलाज में सबसे जटिल मानी जाती हैं. सर्जरी की अगुवाई एम्स के डॉ. अनुपम दास और डॉ. प्रमोद चंदोलिया ने की.

सर्जरी में विशेषज्ञों ने दिया योगदान
इनकी मदद के लिए पीजीआई चंडीगढ़ से विशेषज्ञ एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. सुंदर नेगी और परफ्यूजनिस्ट नवीन को बुलाया गया था. एम्स जोधपुर की एनेस्थेसियोलॉजिस्ट टीम का नेतृत्व डॉ. मनोज कमल और परफ्यूजनिस्ट कमलेश ने किया. शिशुओं की शुरुआती देखभाल से लेकर सर्जरी तक हार्ट सर्जरी विभागाध्यक्षआलोक शर्मा और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुरेंद्र देवड़ा का योगदान रहा.

1000 में से 10 बच्चों में होती है बीमारी
एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्द्धनदत्त पुरी ने जटिल सर्जरी की सुविधा एम्स में शुरूहोने पर संबंधित डॉक्टरों और पूरी टीम को शुभकामनाएं दी. दरअसल ब्लू बेबीज एक आम बीमारी है. यह पैदा होने वाले एक हजार में से 10 बच्चों में होती है.

ऐसे हुआ ऑपरेशन
हमारे हृदय यानी हार्ट से दो बड़ी धमनियां निकलती है.एक धमनी (पलमोनरी आर्टरी) अशुद्ध रक्त लेकर फेफड़ों में जाती है जिससे वहां खून को ऑक्सीजन मिल सके.दूसरी बड़ी धमनी (एरोटा या महाधमनी) हमारे हार्ट से शुद्ध ऑक्सीजनीकृत खून की आपूर्ति पूरे शरीर में करती है.ट्रकस आर्टेरियस बीमारी में दो धमनी की बजाय एक धमनी ही होती है.दोनों के बीच पर्दा नहीं बनता है.डॉक्टरों ने पलमोनरी आर्टरी को काटकर अलग किया और उसके स्थान पर आर्टिफिशिल आर्टरी लाकर उसका कनेक्शन हृदय से कर दिया. इसके अलावा से जहां शुद्ध और अशुद्ध रक्त मिक्स हो रहा था, उस छेद बंद कर दिया.

दूसरे बच्चे में उलटी-पुलटी लगी हुई थी बड़ी धमनियां
एम्स में आए दूसरे बच्चे का आर्टेरियल स्विच ऑपरेशन किया गया. इस बीमारी में दोनों बड़ी धमनियां उलटी-पुलटी लगी हुई होती हैं.सामान्य स्थिति में पलमोनरी आर्टरी अशुद्ध खून को फेफड़ों तक ले जाती है लेकिन इस बीमारी में वह अशुद्ध खून को शरीर के अन्य अंगों तक ले जा रही थी. ऐसा ही दूसरी तरफ था जिसमें महाधमनी शुद्ध खून को शरीर के बजाए फेफड़ों को आपूर्ति कर रही थी. डॉक्टरों ने इस ऑपरेशन के जरिए दोनों धमनियों को बदल दिया.

घरजीवन शैली

ब्लू बेबीज की हो सकेगी हार्ट सर्जरी, 1000 में मात्र 10 बच्चों को है ये बीमारी



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