ऑपरेशन सिंदूर के बाद से डरा हुआ है पाकिस्तान, ड्रोन भेजने की वजह आई सामने

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हाल के दिनों में जो ड्रोन भारत–पाकिस्तान की सीमा के पास देखे गए हैं, वे बहुत छोटे आकार के थे. ये ड्रोन लाइट जलाकर उड़ रहे थे और ज्यादा ऊंचाई पर नहीं थे. ऐसे ड्रोन बहुत कम बार दिखाई दिए. 10 जनवरी को करीब 6 ड्रोन नजर आए थे. वहीं, 11 और 12 जनवरी को 2–3 ड्रोन देखे गए. भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह जानकारी 13 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी.

निराशा हाथ लगी पाकिस्तान को

सेना प्रमुख ने बताया कि ये ड्रोन डिफेंसिव ड्रोन थे. इनका मकसद यह देखना हो सकता है कि भारतीय सेना की तरफ से कोई कार्रवाई तो नहीं हो रही है. साथ ही यह भी जांचने की कोशिश हो सकती है कि कहीं सुरक्षा में कोई कमी या खाली जगह तो नहीं है, जहां से आतंकियों को भेजा जा सके. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी होगी. ऐसा इसलिए क्योंकि अभी भारतीय सेना की सुरक्षा में ऐसी कोई जगह या कमजोरी नहीं है, जहां से आतंकियों की घुसपैठ हो सके.

इस तरह की ड्रोन गतिविधि भारत को स्वीकार नहीं

जनरल द्विवेदी ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर मंगलवार को डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस) स्तर की बातचीत हुई है. इस बातचीत में साफ तौर पर कहा गया है कि इस तरह की ड्रोन गतिविधि भारत को स्वीकार नहीं है. इसे तुरंत बंद किया जाए.

ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी: उपेंद्र द्विवेदी

उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकियों के ठिकानों को नष्ट करने के लिए अंदर तक कार्रवाई की गई. इस्लामाबाद की पुरानी परमाणु धमकियों को नजरअंदाज किया गया. जनरल द्विवेदी ने साफ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. भविष्य में किसी भी दुस्साहस का मजबूती से जवाब दिया जाएगा.

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उत्तरी मोर्चे पर हालात फिलहाल स्थिर

सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी मोर्चे पर हालात फिलहाल स्थिर हैं. हमारी पैनी नजर चीन के साथ लगे इलाकों में है. बातचीत और भरोसा बढ़ाने से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. उन्होंने बताया कि सैन्य क्षमता को मजबूत किया जा रहा है. जम्मू-कश्मीर की स्थिति संवेदनशील है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है.





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