Ashadot

गुमनाम क्रांतिकारी सुखदेव राज, चंद्रशेखर आजाद के थे करीबी साथी: विनोबा भावे की प्रेरणा से पहुंचे थे दुर्ग, जीवन भर कुष्ठ रोगियों की सेवा की – durg-bhilai News

गुमनाम क्रांतिकारी सुखदेव राज, चंद्रशेखर आजाद के थे करीबी साथी:  विनोबा भावे की प्रेरणा से पहुंचे थे दुर्ग, जीवन भर कुष्ठ रोगियों की सेवा की – durg-bhilai News
Spread the love share


दुर्ग में मनाई गई क्रांतिकारी सुखदेव राज की 52वीं पुण्यतिथि

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अंडा गांव में आज इतिहास में गुमनाम रहे महान क्रांतिकारी सुखदेव राज की 52वीं पुण्यतिथि मनाई गई। कार्यक्रम में दुर्ग सांसद विजय बघेल, क्षेत्रीय विधायक ललित चंद्राकर सहित सरपंच एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

क्रांतिकारी सुखदेव राज का परिचय

दुर्ग में सुखदेव के साथी गुरबीर सिंह भाटिया ने बताया कि सुखदेव राज, शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के करीबी सहयोगियों में से एक थे। भगत सिंह के साथ राजगुरु और सुखदेव थापर को फांसी दी गई थी।

लेकिन यह सुखदेव राज अलग हैं, जो चंद्रशेखर आजाद के साथ 27 फरवरी 1931 को उस वक्त मौजूद थे, जब इलाहाबाद (प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क (चंद्रशेखर आजाद पार्क) में अंग्रेजों ने उन्हें घेरकर गोली मारी थी।

तब अंग्रेजों की घेराबंदी में घिरने से पहले चंद्रशेखर आजाद ने सुखदेव राज को अपनी क्रांतिकारी कार्यों को आगे जारी रखने के लिए वहां से चले पर मजबूर कर दिया था। इसलिए सुखदेव राज वहां से जीवित निकल गए थे।

आजादी से दुर्ग का सफर

दुर्ग में साथी रहे कुलबीर सिंह भाटिया और कनक तिवारी बताते हैं कि सुखदेव राज आजादी के बाद कोलकाता में रामकृष्ण मिशन आश्रम में रहकर अपनी सेवाएं देते रहे।

इस दौरान उनकी मुलाकात भूदान आंदोलन से जुड़े आचार्य विनोबा भावे से हुई। उन्होंने विनोबा भावे से आग्रह किया कि उनकी सेवाएं देश के अन्य जगहों पर ली जाए।

विनोबा भावे ने उन्हें छत्तीसगढ़ जाने के लिए प्रेरित किया। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 1960 के आसपास कुष्ठ रोग से काफी ज्यादा पीड़ित थे।

1963 में दुर्ग जिले पहुंचे सुखदेव राज ने जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर बालोद रोड पर बसे अंडा गांव में कुष्ठ रोगी की सेवाओं के लिए आश्रम की स्थापना की।

जहां वे जीवन पर्यंत कुष्ठ रोगियों की सेवा करते रहे। तब उनकी पहचान स्वामी के रूप में थी, क्योंकि वह रामकृष्ण मिशन से जुड़कर स्वामी की तरह सेवा कार्यों में लगे थे।

गुमनाम क्रांतिकारी सुखदेव राज, चंद्रशेखर आजाद के थे करीबी साथी: विनोबा भावे की प्रेरणा से पहुंचे थे दुर्ग, जीवन भर कुष्ठ रोगियों की सेवा की - durg-bhilai News

1976 में सेवा स्थल पर स्मारक और प्रतिमा स्थापित

सुखदेव राज का निधन वर्ष 1973 में हुआ। उनका अंतिम संस्कार शहर के हरना बांधा मुक्तिधाम में किया गया था। 3 साल बाद वर्ष 1976 में अंडा में उनके सेवा स्थल पर स्मारक और प्रतिमा स्थापित की गई।

प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामा चरण शुक्ल, भगत सिंह के छोटे भाई करतार सिंह जैसे शख्सियत के साथ हजारों की भीड़ उपस्थित थी।

गुमनाम क्रांतिकारी सुखदेव राज, चंद्रशेखर आजाद के थे करीबी साथी: विनोबा भावे की प्रेरणा से पहुंचे थे दुर्ग, जीवन भर कुष्ठ रोगियों की सेवा की - durg-bhilai News

सुखदेव राज के जीवन पर “ज्योति जगी” पुस्तक

सुखदेव राज के दुर्ग में सहयोगी रहे प्रदेश के पूर्व राज्य महाधिवक्ता कनक तिवारी ने बताया कि उन्होंने अपने क्रांतिकारी जीवन पर एक पुस्तक भी “ज्योति जगी” लिखी थी, जिसमें सुखदेव राज के समग्र जीवन का उल्लेख है।

सांसद विजय बघेल का कहना है कि कई ऐसे शख्स हैं, जिनका आजादी में महत्वपूर्ण योगदान था, लेकिन उनके नाम का उल्लेख कहीं नहीं है। ऐसे ही शख्स थे, सुखदेव राज जिनकी प्रतिमा हमारे जिले के अंडा गांव में स्थापित है। सुखदेव राज जो आजादी के दीवाने शहीद चंद्रशेखर आजाद के मित्र थे और उनके समकक्ष थे।

उनका जीवन का अमूल्य क्षण देश की आजादी के लिए बीता और बहुत-सा वक्त हमारे दुर्ग के अंडा गांव में जहां पर हम सब पुण्यतिथि मना रहे हैं। वे विनोबा भावे के पद चिन्हों पर चलते हुए कुष्ठ रोगियों की सेवा करते-करते उनके यहां निधन हो गया।



Source link


Spread the love share
Exit mobile version