आकाशीय बिजली से मौत मामले में बिहार दूसरे नंबर पर: 2024 में 253 लोगों की जान गई, प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में होती है ज्यादा थंडरिंग – Bihar News

Spread the love share


बुधवार को सहरसा में एक पेड़ पर बिजली गिरने के बाद आग लग गई।

बिहार में 9 अप्रैल को आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने से 17 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। सबसे ज्यादा बेगूसराय और दरभंगा में 5-5 मौतें हुई हैं। जबकि मधुबनी में 4, सहरसा में 2 और औरंगाबाद में 1 की जान चली गई। ये बिहार में इस साल के शुरुआती आंकड़े हैं।

पिछले 5 साल की बात करें तो बिहार में 1000 से ज्यादा लोगों की जान आकाशीय बिजली की चपेट में आने हुई है। 2024 में आकाशीय बिजली गिरने से प्रदेश में 253 मौतें हुई थीं। जबकि आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 280, 2022 में 400, 2023 में 242 लोगों की जान जा चुकी है।

देश में आकाशीय बिजली से मौत मामले में बिहार दूसरे नंबर पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हर साल औसतन करीब 2500 लोगों की मौत होती है।

NCRB के मुताबिक, प्राकृतिक आपदाओं से कुल मौतों में करीब 39% मौतें बिजली गिरने की वजह से होती हैं।पढ़िए आखिर बिहार में आकाशीय बिजली गिरने के पीछे क्या है वजह और क्यों इतनी मौतें होती हैं…

दक्षिण बिहार के हिस्से में ज्यादा गिरती है आकाशीय बिजली

बिहार में आकाशीय बिजली शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों में गिरती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसका आभास ज्यादा होता है। ठनका गिरता है तो वो वर्टिकल होता है, जो चारों ओर फैलता है।

शहरों में कंजस्टेड घरों के होने से यह चारों तरफ नहीं फैल पाता। जबकि गांवों में खुली जगह होने की वजह से इसका प्रभाव ज्यादा होता है।

2020 में आपदा प्राधिकरण ने बिहार में गिरने वाली आकाशीय बिजली को लेकर स्टडी की। इसमें पाया गया कि राज्य के गांवों में बिजली गिरने से ज्यादा मौतें हो रही हैं।

इनमें वो लोग अधिक संख्या में शामिल थे, जो खेत में काम कर रहे थे। स्टडी में यह भी पाया गया कि ‘दक्षिण बिहार के हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं।’

बिहार में आकाशीय बिजली गिरने के प्रमुख कारण

बिहार में आकाशीय बिजली गिरने की 3 प्रमुख वजह हैं- भौगोलिक, जलवायु और पर्यावरणीय। तीनों वजहें बिहार को आकाशीय बिजली के लिए संवेदनशील क्षेत्र बनाते हैं।

  • मानसून का प्रभाव और हाई ह्यूमिडिटी : बिहार में मानसून के दौरान भारी बारिश होती है, इससे नमी से भरे बादल बनते हैं। ये बादल गरम और ठंडी हवाओं के बीच टकराव से चार्ज उत्पन्न करते हैं, इसके परिणामस्वरूप बिजली बनती है, जो धरती पर गिरती है। बिहार की जलवायु में हाई ह्यूमिडिटी और टेम्प्रेचर इस प्रोसेस को बढ़ावा देता हैं।
  • भौगोलिक कंडिशन: बिहार मैदानी इलाका है। इसका नार्थ इलाका हिमालय के करीब हैं। हिमालय से आने वाली ठंडी हवाएं और मैदानों की गर्म हवाएं आपस में जुड़ती हैं, जिससे बादलों में इलेक्ट्रिक चार्ज उत्पन्न होता है। ये प्रोसेस आकाशीय बिजली की संभावना को बढ़ा देता है।
  • ग्रामीण इलाकों की संख्या ज्यादा: बिहार में अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। अधिकांश लोग खेतों में काम करते हैं। खुले मैदानों में बिजली गिरने की संभावना अधिक होती है। इन जगहों में छिपने की जगह भी कम होती है। इसके अलावा, ऊंचे पेड़ों या स्ट्रक्चर की कमी से बिजली सीधे जमीन पर गिरती है।
  • मिट्टी और पानी की उपलब्धता: बिहार में नदियों और जलाशयों की भरमार है, जो मिट्टी को नम रखते हैं। नम मिट्टी बिजली के लिए एक अच्छा कंडक्टर होता है, इससे आकाशीय बिजली का इफेक्ट बढ़ जाता है।
  • जलवायु परिवर्तन का असर: बीते कुछ सालों में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में अनियमितता बढ़ी है। तापमान में तेज उतार-चढ़ाव और मौसमी घटनाएं बिहार में आकाशीय बिजली की अनुपात को बढ़ा रही हैं।
आकाशीय बिजली से मौत मामले में बिहार दूसरे नंबर पर: 2024 में 253 लोगों की जान गई, प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में होती है ज्यादा थंडरिंग - Bihar News

बिजली गिरने से सबसे ज्यादा नुकसान किसे

बिजली गिरने से उन्हीं लोगों को ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जो खुले में हों। घर और कार जैसी बंद जगह इंसान को बिजली से बचाती है। कार पर जब बिजली गिरती है, तब वह टायर से होते हुए जमीन में चली जाती है।

घर पर बिजली गिरने से वह नींव के रास्ते जमीन में जाती है। बिजली गिरते समय अगर कोई पानी के संपर्क में आता है या फोन का इस्तेमाल कर रहा हो या फिर बारिश से बचने के लिए पेड़ का सहारा लेता है तो ऐसे इंसान आकाशीय बिजली की चपेट में आ सकते हैं।

आकाशीय बिजली से कैसे बच सकते हैं?

मानसून का सीजन आते ही आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। खास तौर पर खुले स्थान में काम करने वाले किसान और मजदूरों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

आकाशीय बिजली के बचाव के लिए पहले से तैयारी और बिजली गिरने पर सुरक्षित बचाव के तरीके के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। खासकर जो लोग बारिश के समय घर से बाहर हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

आकाशीय बिजली से मौत मामले में बिहार दूसरे नंबर पर: 2024 में 253 लोगों की जान गई, प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में होती है ज्यादा थंडरिंग - Bihar News

बिहार में आकाशीय बिजली से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं…

IIT पटना बना रहा बिजली से बचाने का लॉकेट

IIT पटना ऐसा लॉकेट बना रहा है जो लोगों के गले में होगा और आकाशीय बिजली से जुड़ा अलर्ट जारी करेगा। इससे खेत में काम करने वाले या खुले में जाने वाले लोग जागरूक हो जाएंगे और अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों पर चले जाएंगे।

इसकी आवाज अभी कम थी, इसलिए इसे बढ़ाने का सुझाव आपदा प्राधिकरण की ओर से दिया गया है। इसका नाम नीतीश रखा गया है। सशक्त नोवेल इनिशिएटिव टेक्नोलॉजिकल इंटरवेंशन फॉर सेफ्टी ऑफ़ ह्यूमनलाइव्स (NITISH)। इसका हिंदी अर्थ है नी-नीत, ती-तीव्र, श-शक्तिशाली सुरक्षा कवच।

तीन मिनट पहले यह बिजली के साथ ही अत्यधिक गर्मी और बाढ़ की जानकारी भी देगा। ये 43 ग्राम का लॉकेट है। बड़ी बात यह है कि इसे चार्ज करने की जरूरत नहीं होगी। ये शरीर की गर्मी से ही चार्ज होता रहेगा। आपदा प्राधिकरण लॉकेट के लिए 80 लाख रुपए भी दे चुका है।

आकाशीय बिजली से मौत मामले में बिहार दूसरे नंबर पर: 2024 में 253 लोगों की जान गई, प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में होती है ज्यादा थंडरिंग - Bihar News

19वीं सदी में पता चली थी बिजली गिरने की सही वजह

वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रेंकलिन ने पहली बार 19वीं सदी में यानी 1872 में बिजली गिरने के सही कारणों को दुनिया के सामने रखा था। उन्होंने बताया था कि ‘जब आसमान में बादल छा जाते हैं तो उसमें मौजूद पानी के छोटे-छोटे कण हवा की वजह से एक दूसरे से रगड़ खाने लगते हैं। इससे वो कण चार्ज हो जाते हैं।’

‘इसमें कुछ बादलों पर पॉजिटिव चार्ज तो कुछ पर नेगेटिव चार्ज आ जाता है। जब ये दोनों तरह के चार्ज वाले बादल मिलते हैं तो उनमें लाखों वोल्ट की बिजली पैदा होती है।’

आकाशीय बिजली से मौत मामले में बिहार दूसरे नंबर पर: 2024 में 253 लोगों की जान गई, प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में होती है ज्यादा थंडरिंग - Bihar News

—————

ये भी पढ़ें…

बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 17 लोगों की मौत:सहरसा-मधुबनी में बिजली गिरने का लाइव वीडियो; 4 जिलों में ओला गिरने का अलर्ट

आकाशीय बिजली से मौत मामले में बिहार दूसरे नंबर पर: 2024 में 253 लोगों की जान गई, प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में होती है ज्यादा थंडरिंग - Bihar News

बिहार के 4 जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा बेगूसराय और दरभंगा में 5-5 मौतें हुई है। वहीं मधुबनी में 4 और औरंगाबाद में 1 की मौत हुई हैं। सहरसा में भी बुधवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक 15 साल की लड़की और 35 साल का युवक शामिल हैं। पूरी खबर पढ़िए



Source link


Spread the love share