अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पटना के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने हीट स्ट्रोक (लू) से होने वाली मौतों के संबंध में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खुलासा किया है। शोध के अनुसार, हीट स्ट्रोक से मृत्यु का मुख्य कारण मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस नामक विशेष हिस्से में होने वाली संरचनात्मक क्षति है। यह शोध ‘ए हाइपोथैलेमस सेंटर्ड पैथोजेनेसिस ऑफ हीट स्ट्रोक डेथ्स- ए पोस्टमॉर्टम बेस्ड ह्यूमेन स्टडी’ शीर्षक से किया गया है। फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने इस अध्ययन का नेतृत्व किया, जो हीट स्ट्रोक से होने वाली मौतों की जांच में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। मानव मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस वह हिस्सा है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। सामान्य परिस्थितियों में, यह शरीर को ठंडा या गर्म रखने के लिए आवश्यक संकेत देता है। हालांकि, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी और आर्द्रता के संपर्क में रहता है, तो यह तापमान नियंत्रण केंद्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। डॉ. अशोक कुमार के अनुसार, हीट स्ट्रोक के दौरान अग्र हाइपोथैलेमस में होने वाली सूक्ष्म लेकिन गंभीर संरचनात्मक क्षति शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता को पूरी तरह समाप्त कर देती है। यही स्थिति अंततः मृत्यु का कारण बनती है। यह अध्ययन पोस्टमॉर्टम के आधार पर इस तरह की स्पष्ट और वैज्ञानिक पुष्टि प्रदान करने वाला पहला शोध है। कैसे किया गया यह अध्ययन? यह शोध वर्ष 2024 में पटना और उसके आसपास के क्षेत्रों में सामने आए हीट स्ट्रोक के मामलों पर आधारित है। उस दौरान क्षेत्र में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और आर्द्रता 95�तक दर्ज की गई थी। कई लोग 5 से 8 घंटे तक लगातार गर्मी के संपर्क में रहे,इन परिस्थितियों में मृत्यु को प्राप्त व्यक्तियों के विस्तृत पोस्टमॉर्टम किए गए। इस अध्ययन में केवल बाहरी लक्षणों पर नहीं, बल्कि मस्तिष्क और रक्त वाहिकाओं के सूक्ष्म स्तर पर होने वाले परिवर्तनों का भी गहन विश्लेषण किया गया। फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने यह कार्य एनाटॉमी और पैथोलॉजी विभागों के सहयोग से पूरा किया, जिससे निष्कर्ष अधिक सटीक और विश्वसनीय बन सके।
Source link