आखरी अपडेट:
Agriculture News: किसान रणवीर रंजन ने लोकल 18 से कहा कि वे अंतर्वर्ती और मिश्रित खेती कर रहे हैं. एक ही जगह 10 हेक्टेयर के एक प्लॉट को तैयार करके इसी खेत में आलू, राजमा, मटर जैसी फसलों के साथ केले की खेती की जा रही है. अब तक खेती में 1 से 2 लाख रुपये का ही खर्च आया है. एक सीजन में 40 से 50 लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है.
नई कहानी बिहार के बेगूसराय जिले से खेती-किसानी से जुड़ी सामने आई है. जो यह साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल हो, तो खेती भी मुनाफे का बड़ा साधन बन सकती है. जिले के खोदावंदपुर प्रखंड के किसान रणवीर रंजन ने उद्यान विभाग के सहयोग से खेती में ऐसा प्रयोग किया है, जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक हो रही है.
किसान रणवीर रंजन ने लोकल 18 से कहा कि इस आधुनिक खेती से जुड़ने में जिला उद्यान पदाधिकारी बेगूसराय डॉ. अमरजीत कुमार राय के मार्गदर्शन का असर है. इन्होंने जब आधुनिक और मिश्रित खेती के फायदे बताएं फिर उद्यान विभाग से जुड़कर प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अभिषेक की मदद से अपनी सफ़लता के कदम बढ़ा रहे हैं
एक ही खेत में चार फसल
रणवीर रंजन ने बताया कि वे अंतर्वर्ती और मिश्रित खेती कर रहे हैं. उन्होंने एक ही जगह 10 हेक्टेयर के एक प्लॉट को तैयार करके इसी खेत में आलू, राजमा, मटर जैसी फसलों के साथ केले की खेती की जा रही है .इस तरह की खेती से जमीन का पूरा उपयोग होता है और उत्पादन भी कई गुना बढ़ जाता है .किसान के अनुसार, फसल चक्र और सही दूरी के साथ खेती कर रहे हैं . महीने में एक दो स्प्रे मज़दूर को रखकर फसलों की निगरानी करते रहते हैं.
उद्यान विभाग की अहम भूमिका
किसान का कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे उद्यान विभाग की सबसे बड़ी भूमिका रही है. विभाग की ओर से उन्हें ड्रिप इरिगेशन तकनीक उपलब्ध कराई गई, जिससे पटवन की समस्या लगभग खत्म हो गई. इसके साथ ही केले, आलू, राजमा जैसी फसलों के लिए टिश्यू कल्चर बीज भी उपलब्ध कराए गए. सबसे खास बात यह रही कि ड्रिप इरिगेशन सिस्टम को विभाग की टीम ने खुद आकर खेत में स्थापित किया.
कम लागत, चार गुना मुनाफा
रणवीर रंजन लोकल 18 पर बताते हैं कि पूरी खेती में अब तक करीब 1 से 2 लाख रुपये का ही खर्च आया है . आधुनिक तकनीक की वजह से बिजली बिल और मजदूरी का खर्च भी न के बराबर हो गया है. ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत हुई और समय पर सिंचाई संभव हो पाई.किसान का अनुमान है कि एक साल के पूरे सीजन के बाद उन्हें 40 से 50 लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है.
अन्य किसानों के लिए मिसाल
रणवीर रंजन की यह सफलता अब इलाके के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. वे मानते हैं कि अगर किसान पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर आधुनिक खेती अपनाएं और सरकारी योजनाओं का सही लाभ लें, तो खेती को घाटे का सौदा नहीं बल्कि फायदे का व्यवसाय बनाया जा सकता है.बेगूसराय जिले की यह कहानी बिहार के किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है.