दरभंगा: जिले में पुरातत्व विभाग की खुदाई में एक नया खुलासा हुआ है . दरभंगा जिले के हनुमाननगर प्रखंड क्षेत्र के पटोरी गांव में छठी शताब्दी में कोई बस्ती या नगर हुआ करता होगा, ऐसा दावा पुरातत्व शोधार्थी मुरारी झा ने किया है .
पटोरी गांव की खुदाई
मुरारी झा ने बताया कि पटोरी गांव में जो पूरा स्थल है, जिसे स्थानीय लोग स्थान भी कहते हैं, वहां परस्तर का एक ढांचा है. उन्होंने कहा, ‘उस ढांचे को देखकर के हम यह कह सकते हैं कि वह मूर्ति बनाने के उपयोग में लाया गया होगा . लेकिन वह अनगढ़ है, अनगढ़ मतलब वह पूर्ण रूप से मूर्ति तैयार नहीं है.’
बलुआ पत्थर की मूर्ति
मुरारी झा ने बताया कि मूर्ति का जो पदार्थ है, वह बलुआ पत्थर है. शोध के मुताबिक, बलुआ पत्थर हमारे यहां इस क्षेत्र में छठी शताब्दी ईस्वी से पूर्व में उपयोग होता था. उन्होंने कहा, ‘इधर अशोक के पिलर या मॉडर्न जितने मूर्तियां हैं, वह सब भी बलुआ पत्थर से बना हुआ है . तो यह मूर्ति भी निश्चित रूप से बलुआ पत्थर से बने होने के कारण छठी शताब्दी ईस्वी से पूर्व के होंगे.’
अवशेषों का अवलोकन
मुरारी झा ने बताया कि अवशेषों का अवलोकन किया जाए तो ब्लैक एंड रेड वेयर वहां से मिल रहा है, ग्रे वेयर वहां से मिल रहा है, और कई सारे अवशेष मिल रहे हैं . यह सब चीज मिलाने का मतलब है कि ईसवी पूर्व के अवशेष वहां हमें दिख रहे हैं .
प्राचीन कुआं
साथ ही, मुरारी झा ने बताया कि वहां पर एक प्राचीन कुआं भी है . स्थानीय लोगों का कहना है कि उसे कुआं के पानी से चर्म रोग से संबंधित बीमारियां ठीक हो जाती थी, ऐसी मान्यता है .
पुरातत्व विभाग की जरूरत
हालांकि इन तमाम तथ्यों को बावजूद मुरारी झा ने बताया कि जब तक की पुरातत्व विभाग की तरफ से वहां पर उपकरण कार्य या फिर वैज्ञानिक कार्य नहीं होता है, तब तक कुछ भी क्लियर बता पाना मुश्किल है .