जिले के देवी मंदिरों में मुखर हुई मां दुर्गा की अराधना की अनुगूंज

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जिले भर में श्रद्धा और भक्ति के साथ हुई मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की अर्चनाकामना गोपालगंज, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। शारदीय नवरात्र में आठवें दिन गुरुवार को महाअष्टमी के मौके पर महागौरी की पूजा…

न्यूज़रैप हिन्दुस्तानगोपालगंजगुरु, 10 अक्टूबर 2024 06:16 अपराह्न
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जिले भर में श्रद्धा और भक्ति के साथ हुई मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की अर्चना श्रद्धालुओं ने मां को प्रसाद,फूल,चुनरी चढ़ाकर मां से की परिवार के लिए मंगलकामना गोपालगंज, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। शारदीय नवरात्र में आठवें दिन गुरुवार को महाअष्टमी के मौके पर महागौरी की पूजा श्रद्धा से हुई। अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं का मां दुर्गा की पूजा के लिए देवी मंदिरों, पूजा पंडालों और शक्ति पीठों में कतार लगी रही। या देवी सर्वभूतेषु की अनुगूंज से मंदिरों और पूजा पंडाल गूंजित होते रहे। मां दुर्गा को पुष्प और प्रसाद अर्पित कर श्रद्धालुओं ने मंगल कामना की। शहर के जादोपुर रोड स्थित दुर्गा मंदिर, सिनेमा रोड स्थित काली मंदिर, थावे दुर्गा मंदिर, लाछवार दुर्गा मंदिर, बरौली के देवीगंज नकटो भवानी के मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में सुबह भक्तों की भीड़ रही।श्रद्धालुओं ने देवी मां के प्रिय नारियल ओर चना का प्रसाद चढ़ाया तथा पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। आज मां सिद्धिदात्री की होगी पूजा, विजयादशमी कल मां दुर्गा के नौंवी शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देनी वाली हैं। शुक्रवार को महानवमी तिथि सुबह में 6:42 बजे से होगी। शुक्रवार को श्रद्धालु देवी के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना करेंगे। शनिवार को विजयदशमी मनाया जाएगा। शनिवार को दशमी तिथि की शुरुआत सुबह 5:37 बजे से होगी। विधान के अनुसार नवरात्रि अनुष्ठान व व्रत करने वाले शुक्रवार को नवमी तिथि में हवन कर व्रत की पूर्णाहुति करेंगे। लेकिन व्रत का पारण व्रती शनिवार को करेंगे। आचार्य चंद्रकिशोर मणि त्रिपाठी ने बताया कि कोई भी पूजा और मंत्र का जप बिना हवन के अपूर्ण है। किसी भी वैदिक पूजा में हवन का विशेष महत्व है। ग्रहों के बीज मंत्र की निश्चित संख्या होती है, उतनी संख्या में जप तथा उसका दशांश हवन अति आवश्यक है। नवरात्र में माता दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती के विभिन्न मंत्रों से माता को प्रसन्न करने के लिए हवन करने का विधान है। आम की लकड़ी आमतौर पर हवन हेतु प्रयोग की जाती है। हवन की सम्पूर्ण सामाग्री के साथ जौ का प्रयोग नवरात्र के हवन में अवश्य करना चाहिए। तिल के प्रयोग से आध्यात्मिक उत्कर्ष एवं कष्टों का शमन होता है। गुड़ का प्रयोग मंगल और सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए है। हवन में गाय का घी ही प्रयोग करना चाहिए। सूखे हवन वाले नारियल का प्रयोग अंत में करें। खास कर महिलाओं को हवन के पश्चात स्वयं से नारियल हवन कुंड में नहीं रखना चाहिए। हवन के बाद कन्याओं का पूजन कर कराएं भोजन आचार्य ने बताया कि बिना कन्या पूजन के नवरात्रि और मां दुर्गा की पूजा अधूरी मानी जाती है। एक भक्त के रूप में आपके पास विश्वास, पवित्रता और समर्पण होना चाहिए। पूजा के दौरान उन्हें लड़कियों के रूप में न देखें। शास्त्रों में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कुमारी कन्या के पूजन का विधान बताया गया है। आचार्य ने बताया कि श्रीमद्देवीभागवत के प्रथम खण्ड के तृतीय स्कंध में 2 वर्ष की कन्या को ‘कुमारी कहा गया है। इनकी पूजा करने से भक्तों के दुख और दरिद्रता का नाश होता है। धन, आयु एवं बल में वृद्धि होती है। सुभद्रा,रोहिणी और शांभवी की है पूजन की मान्यता मान्यता के अनुसार तीन वर्ष की कन्या को ‘ त्रिमूर्तिकहते हैं। इनके पूजन से धर्म, अर्थ, काम की पूर्ति होती है। चार वर्ष की कन्या को ‘कल्याणी कहा गया है। इनके पूजन से विद्या, विजय, राज्य तथा सुख की प्राप्ति होती है। पांच वर्ष की कन्या को ‘कालिकाकहा गया है। इनके पूजन से शत्रुओं का नाश होता है। छह वर्ष की कन्या को ‘चंडिकाकहा गया है। इनके पूजन से ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति होती है।सात वर्ष की कन्या को ‘शाम्भवी कहा गया है। इनकी पूजा से लड़ाई एवं वाद-विवाद समाप्त होता है।आठ वर्ष की कन्या को ‘दुर्गा का स्वरूप माना गया है। इनके पूजन से परलोक में उत्तम गति और साधना में सफलता प्राप्त होती है।नौ वर्ष की कन्या को ‘सुभद्रा कहा गया है। इनके पूजन से जटिल रोगों का नाश होता है। 10 वर्ष की कन्या को ‘रोहिणी कहा गया है। इनके पूजन से सभी मनोरथ पूरे होते हैं। पूजा पंडालों की शोभा देखते ही बन रही शहर में बने देश-विदेश की धार्मिक स्थलों की अनुकृति के पंडाल, मनमोहक लाइटिंग, देवी की आकर्षित करती चिताकर्षक प्रतिमाएं को हर किसी की नजर ठहर जा रही है। मईया के मनमोहक रूप देखकर हर कोई उनके दरबार में खींचा चला जा रहा है। जिले में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह और आकर्षण अपने चरम पर पहुंच गया है। जिले के साथ पड़ोसी जिलों से भी श्रद्धालु पंडाल, प्रतिमा और मेला देखने के लिए पहुंच रहे हैं। पूजा समिति की ओर से भी प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। महम्मदपुर मोड़ पर स्थापित मां की प्रतिमा देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।



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