बोधगया मठ ने नालंदा और बोधगया को बचाया: राज्यपाल ने कहा- भारत की आध्यात्मिक शक्ति, संत, मठ और मंदिरों की अनवरत भूमिका – Gaya News

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गया पहुंचे बिहार के राज्यपाल आयरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ने दुनिया को केवल धर्म ही नहीं, बल्कि दिव्यता और मानवता का संदेश भी दिया है। यही कारण है कि प्राचीन काल की कई सभ्यताएं विलुप्त हो गईं, लेकिन भारत का आध्यात्मिक ज्ञान आज भ

राष्ट्र निर्माण में संत, मठ और मंदिरों की भूमिका सदियों से अहम रही है। ये बातें प्रदेश के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बुधवार को श्री शंकराचार्य मठ, बोधगया में आयोजित इष्ट इंडिया डिविजनल काउंसिल ब्रह्मचारी एवं संन्यासी संघोत्सव 2025 में कहीं।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की परंपरा समावेशी रही है। यहां के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। समाज का नेतृत्व हमेशा ऋषि-मुनियों ने किया है। राजनीतिक सत्ता शासन कर सकती है, लेकिन समाज और मानवता का नेतृत्व केवल संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने किया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की भूमि हमेशा विचारों और दर्शन के लिए खुली रही है। यही कारण है कि यहां अलग-अलग विचारधाराएं पनपीं और फली-फूलीं।

सनातन संस्कृति की व्यापकता

आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि अद्वैत का अर्थ किसी से भेदभाव न करना है। वेदों और भारतीय संस्कृति की मूल जड़ों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने मानवता के लिए दिव्यता की शिक्षा दी है।

भगवान बुद्ध के अहिंसा संदेश की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आततायी को रोकने के लिए शस्त्रों का प्रयोग उचित है, क्योंकि शस्त्रों का उद्देश्य अन्याय और अत्याचार को रोकना होता है, न कि किसी से घृणा करना।

राज्यपाल ने भारत की धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के मठों की उदारता ऐसी है कि उन्होंने कभी किसी धर्म को अपने से अलग नहीं माना। कई मठों ने मुस्लिम मजारों को भी सहायता दी है। यही भारतीय संस्कृति की महानता है।

महाबोधि मंदिर का संरक्षण और मठों की भूमिका

संघोत्सव में बोधगया मठ के संन्यासी स्वामी विवेकानंद गिरी ने कहा कि 12वीं शताब्दी में मुगल आक्रमणकारियों ने नालंदा विश्वविद्यालय समेत कई मंदिरों और मठों को नष्ट करने की कोशिश की थी। उस समय श्री शंकराचार्य मठ ने बौद्ध भिक्षुओं को अपने यहां शरण दी और महाबोधि मंदिर की रक्षा की। यह भारतीय संस्कृति की उस सहिष्णुता और एकता का उदाहरण है, जो अलग-अलग धर्मों को जोड़कर रखती है।

भगवद गीता धर्म और जाति के ऊपर

इस्कॉन मंदिर के संरक्षक देवकीनंदन दास ने कहा कि भगवत गीता का संदेश जाति और धर्म से ऊपर है। यह ग्रंथ समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि गीता के उपदेशों को अपनाने से जीवन में संतुलन और शांति बनी रहती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब इस्कॉन के गुरु प्रभुपाद अमेरिका गए, तो उन्होंने हिप्पी युवाओं को आध्यात्मिकता से जोड़ा और उन्हें ‘हैप्पी’ बना दिया। आज भी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और चीन जैसे देशों में भारतीय आध्यात्मिक दर्शन को अपनाया जा रहा है।

विद्वानों की उपस्थिति

संघोत्सव में विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विठ्ठल, वॉट लाओ इंटरनेशनल टेंपल के भिक्षु प्रभारी साईसाना बौद्ध बोंग, गया इस्कॉन मंदिर के प्रभारी जगदीश श्याम दास, बीटीएमसी के भिक्षु धर्मेंद्र, होटल एसोसिएशन के महासचिव संजय कुमार सिंह, चैंबर ऑफ कॉमर्स के कौशलेंद्र प्रताप, अनूप केडिया और विपेंद्र अग्रवाल समेत कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए।

भारत का संदेश दुनिया के लिए

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की संस्कृति केवल एक धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श है। यहां सदियों से चली आ रही संत परंपरा ने समाज को दिशा देने का काम किया है। भारतीय संस्कृति के इसी चिरंतन प्रकाश के कारण ही आज भी दुनिया भारत की ओर देख रही है।



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