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किसान दिनेश सिंह ने मक्का की फसल लगाए है. तेज हवा और गर्मी से फसल में ज्यादा सिंचाई लग रही है. इस बार पहले ही ज्यादा गर्मी पड़ने लगी है, जिससे ज्यादा सिंचाई करनी पड़ रही है. नहर में भी पानी नहीं आ रहा है. जिससे…और पढ़ें
भीषण गर्मी में मक्का,उरद जैसे फसलो को सिंचाई करने का ये है बेहतर तरीका!
जिस तरह से इस महीने में तापमान बढ़ने के साथ ही तेज हवाओं के साथ लू चलने लगती है, गर्मी का असर फसलों पर भी पड़ रहा है, जिससे फसलों में सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है.साथ ही गलत तरीके से सिंचाई के वजह से फसलों में सही तरीका से नमी भी नही आ रहा है. अभी रबी की फसलों में गेहूं की फसल कट रही है, जिसके लिए ये हवाएं सही हैं. लेकिन जायद की फसल उड़द, मूंग, मेंथा, मक्का, गन्ने पर इन तेज गर्म हवाओं का असर पड़ेगा.
भोजपुर गाँव के किसान दिनेश सिंह ने मक्का की फसल लगाए है. तेज हवा और गर्मी से फसल में ज्यादा सिंचाई लग रही है. इस बार पहले ही ज्यादा गर्मी पड़ने लगी है, जिससे ज्यादा सिंचाई करनी पड़ रही है. नहर में भी पानी नहीं आ रहा है. जिससे डीजल इंजन या बिजली से चलने वाले पंप के भरोसे सिंचाई करनी पड़ रही है.
गन्ने की फसल में गर्मी बढ़ने से इल्ली का प्रकोप बढ़ जाता
मई महीना आते-आते मध्य, पश्चिमी और उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पारे के 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाने का अनुमान है. भोजपुर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक शशि भूषण शशि बताते हैं किऐसा नहीं है कि पहली बार इतनी गर्मी पड़ रही है. इस बार मार्च महीने में ही लू चलने लगी है. इसका असर फसलों पर भी पड़ेगा. इसलिए किसानों को तैयार रहने की जरूरत है.आगे तापमान कुछ गिर सकता है. गन्ने की फसल में गर्मी बढ़ने से इल्ली का प्रकोप बढ़ जाता है. इससे प्रभावित गन्ने की फसल सूख जाती है.जिस जगह इस कीड़े का प्रभाव होता है. वहां पौधा झुलसकर पीला पड़ जाता है.कृषि वैज्ञानिक इल्ली से प्रभावित गन्ने की फसल के लिए किसानों को ट्राइकोडरमा 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 75 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए. इससे इल्ली के प्रभाव को रोका जा सकता है.
गर्म हवाओं से बचाने की जरूरत
भीषण गर्मी के दौर में जहां एक तरफ सभी बढ़ते तापमान से बचने के जतन कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर पेड़ पौधों को भी गर्म हवाओं से बचाने की जरूरत है. इस बारे में सीनियर हॉर्टिकल्चरिस्ट महेश तिवाड़ी का कहना है कि पौधों को पानी देने के लिए सुबह के समय का चयन करना चाहिए. क्योंकि खेती-बाड़ी और घर के बगीचे में दोपहर और शाम के वक्त दिया गया. पानी पौधों को जीवन देने की जगह उनके लिए खतरा बन जाता है. इस दौरान धरती का तापमान अधिक होने के कारण पानी जल्द वाष्प में बदलकर उड़ जाता है. लिहाजा पौधे की जरूरत पूरी नहीं हो पाती है.
फसलो को सिंचाई करने का ये है बेहतर तरीका
इसी तरह खेतों को गर्मी से बचाने के लिए खड़ी फसलों में हल्की और लगातार सिंचाई करें. अलग अलग चरणों में इरिगेशन सर्कल को बढ़ाएं. मिट्टी की नमी को संरक्षित करने के लिए फसल अवशेष, पुआल, पॉलीथिन या मिट्टी की मल्चिंग के साथ मल्च का इस्तेमाल करना चाहिए. केवल सुबह के समय ही सिंचाई करनी चाहिए और स्प्रिंकलर का प्रयोग करना चाहिए. यदि आपका क्षेत्र उष्ण लहर से ग्रस्त है, तो हवा के लिए शेल्टर को अपनाना चाहिए. हवा के बहाव को देखते हुए भी किसानों को सिंचाई करना चाहिए.