मजदूर से मालिक का सफर… जज्बा हो तो जहांगीर जैसा, 25 लोगों को दिया है रोजगार

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Success Story: बिहार में सहरसा के बैजनाथपुर निवासी मो. जहांगीर मजदूर से मालिक बने हैं. बिहार सरकार की उद्यमी योजना से 7 लाख रुपये की सहायता लेकर उन्होंने स्टील फैक्ट्री स्थापित की, जिसमें 25 लोगों को रोजगार मिल…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • जहांगीर ने बिहार सरकार की योजना से स्टील फैक्ट्री खोली.
  • सरकार से 7 लाख की सहायता राशि मिली.
  • जहांगीर की फैक्ट्री में 25 लोगों को रोजगार मिला.
सहरसा: कहते हैं ना कि मन में लगन और कुछ करने का जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है. जब किस्मत बदलती है तो अच्छे-अच्छे लोगों का दिन बदल जाता है. यह बात सहरसा के बैजनाथपुर के रहने वाले मो. जहांगीर पर बिल्कुल फिट बैठती है. मो. जहांगीर कभी मजदूर थे और आज मालिक बन गए हैं. मजदूर से मालिक बनने का उनका सफर काफी मुश्किल भरा रहा है. उनकी इस कामयाबी के पीछे सरकार का बड़ा योगदान है. आज सरकार की योजना ने उनकी किस्मत बदल दी है.

सरकारी योजना की मदद से मिली सफलता

बैजनाथपुर के रहने वाले मो. जहांगीर आज सरकार की योजना की मदद से न केवल स्टील फैक्ट्री चला रहे हैं, बल्कि 25 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. उनकी इस फैक्ट्री से 25 परिवारों का घर चल रहा है. पहले ये लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य पलायन करते थे, लेकिन जहांगीर ने उन्हें चिन्हित कर अपनी फैक्ट्री में रोजगार दिया है.

उद्यमी योजना से मिली मदद

जहांगीर को बिहार सरकार के उद्योग विभाग की उद्यमी योजना की जानकारी मिली. उन्होंने इस योजना में अप्लाई किया और सरकार से 7 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त की. इस राशि से उन्होंने स्टील फैक्ट्री स्थापित की, जिसमें अब गोदरेज बॉक्स सहित कई सामान तैयार किए जाते हैं. इस फैक्ट्री में 25 लोग काम कर रहे हैं. जहांगीर का कहना है कि वे इस कारोबार को और आगे बढ़ाना चाहते हैं और इसके लिए सरकार से और उम्मीद लगाए हैं. उनके उद्योग से तैयार सामान सहरसा समेत आसपास के जिलों में सप्लाई होता है.

मजदूर से मालिक बनने का सफर

जहांगीर ने लोकल 18 से बताया कि वे पहले खुद मजदूर थे और स्टील फैक्ट्री में काम करते थे. काफी साल काम करने के बाद उनके मन में खुद की स्टील फैक्ट्री खोलने का प्लान आया, लेकिन संसाधनों की कमी थी. फिर उन्हें सरकार की उद्यमी योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने अप्लाई किया. सरकार से 7 लाख रुपये का ऋण मिलने के बाद उन्होंने स्टील फैक्ट्री खोली.

उन्होंने बताया कि शुरुआत में कम लोगों को रोजगार दिया, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ती गई. आज वे 25 लोगों को रोजगार दे रहे हैं. ये वही लोग हैं जो पहले दूसरे राज्य में मजदूरी करते थे. जहांगीर का कहना है कि एक मजदूर ही दूसरे मजदूर का दर्द समझ सकता है. इसलिए उन्होंने ऐसे लोगों को चिन्हित कर अपनी फैक्ट्री में काम दिया है. अब वे इस उद्योग को और आगे बढ़ाना चाहते हैं और इसके लिए सरकार से और मदद की अपेक्षा है.

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