बिहार विधानसभा के बजट सत्र के बीच नीतीश सरकार ने बड़े आंकड़े पेश किए हैं। यह आंकड़ें सरकारी कर्मचारियों और उनके वेतन से जुड़े हैं। सरकार लालू-राबड़ी शासनकाल से भी अपने काम की तुलना की। इसमें दावा कि पिछले 20 साल सरकारी कर्मियों की संख्या में तीन गुणा से अधिक की वृद्धि हुई है। सरकार की ओर से बताया कि बिहार में सरकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़कर करीब नौ लाख 50 हजार हो गई है। 20 वर्ष पहले तक इनकी संख्या साढ़े 3 लाख तक ही हुआ करती थी। इसमें तीन गुणा से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इतना ही नहीं पिछले दो वर्षों में शिक्षक, सिपाही समेत अन्य को मिलाकर दो लाख से अधिक कर्मियों की बहाली की गई है।
एनडीए सरकार की ओर से कहा गया कि अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित सरकार 10 लाख सरकारी नौकरी के साथ ही एक करोड़ से अधिक रोजगार देने के लक्ष्य से कहीं आगे की कवायद जारी है। विभिन्न स्तर की सरकारी नौकरी लगातार उपलब्ध कराने को लेकर अलग–अलग महकमों के स्तर पर भी निरंतर प्रयास जारी है। इसी का नतीजा है कि पिछले 20 वर्षों में सिर्फ वेतन मद में सरकार के बजट में 13 गुणा से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। हाल में विधानमंडल सत्र में पेश हुए आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट में इससे संबंधित आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है।
2005-06 में पेंशन पद का बजट कितना था?
नीतीश सरकार की ओर से बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2005–06 में प्रस्तुत किए जाने वाले राज्य के बजट में वेतन मद में महज 5 हजार 152 करोड़ रुपए का प्रावधान हुआ करता था। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025–26 में वेतन मद का आकार बढ़कर 51 हजार 690 करोड़ रुपए हो गया और 2026–27 में यह 70 हजार 220 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। राज्य में अब तक का वेतन मद में यह सबसे बड़ा बजट आकर है। इसी तरह पेंशन मद की राशि में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान बजट में यह 35 हजार 170 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो वेतन मद की आधी राशि है। जबकि, वित्तीय वर्ष 2005–06 में पेंशन मद का बजट आकार महज 2 हजार 456 करोड़ रुपए हुआ करता था। वेतन मद की तरह ही इसमें भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
राजद प्रवक्ता ने बताया 2005 से पहले क्या-क्या हुआ?
राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि जब झूठ ही बोलना है तो कुछ भी बोल सकते हैं। 2005 के पहले जो भी स्वीकृत पद थे, सब पर नियमित बहाली होती थी। शिक्षा, पुलिस, प्रोफेसर समेत सभी विभागों में नियमित बहाली होती थी। प्राथमिक विद्यालय खोले गए। बाद में इन्हें माध्यमिक विद्यालयों में उत्क्रमित की गई। एक लाख 90 हजार शिक्षा मित्रों की नियुक्ति की गई। एमबीबीएस डिग्री धारियों को लालू राज में ही नियमित नौकरी मिली। उस वक्त नियमित बहाली होती थी। 2005 के बाद नियमित नियुक्तियों में अघोषित रूप से रोक लगा दिया गया। जो नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुई, उनमें से हजारों की संख्या में फर्जी पकड़ाए हैं।
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डेढ़ साल में तेजस्वी यादव ने चार लाख को नौकरी दी
राजद प्रवक्ता ने यह भी कहा कि 2012-13 में बहाल किए गए 72 हजार सांख्यिकी स्वयंसेवकों की नियुक्ति कर इन्हें हटा दिया गया। दो साल की नौकरी के बाद यह लोग आज पिछले 10 साल से बेरोजगार हैं। जब महागठबंधन की सरकार वापस आई तो तेजस्वी यादव के नेतृत्व बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा नियमित शिक्षकों की बहाली की गई। इस पर एनडीए सरकार अपना क्रेडिट लेती है। तेजस्वी यादव ने डेढ़ साल में ही करीब चार लाख लोगों को नौकरी दी। पांच लाख बहाली की प्रक्रिया कर गए थे। नीतीश सरकार को श्वेत पत्र देना चाहिए कि अब तक कब कितनी संख्या में बहाली किए थे। सरकार केवल झूठ बोल रही है। जीएडी के रिपोर्ट में सबकुछ साफ हो चुका है।