इन्फ्लूएंजा की चपेट में दिल्ली-NCR! लक्षणों से वैक्सीन तक? AIIMS के डॉक्टर ने दिया हर सवाल का जवाब

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दिल्ली में H3N2 इन्फ्लूएंजा वायरस एनसीआर: पिछले कुछ दिनों से लगभग पूरा दिल्ली-एनसीआर इन्फ्लूएंजा (फ्लू) की चपेट में आ गया है. दिल्ली के लगभग सभी अस्पतालों में सैकड़ों मरीज इस बीमारी को लेकर पहुंच रहे हैं. कुछ मरीजों की हालत इतनी खराब है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है. डॉक्टरों की मानें तो यह इन्फ्लूएंजा के वायरस ए के सबटाइप H3N2 की वजह से भी हो सकता है, जिसे हांग कांग फ्लू भी कहते हैं. नाक, गला और फेफड़ों को प्रभावित करने वाला यह फ्लू बहुत तेजी से एक मरीज से दूसरे में फैल रहा है. यह सामान्य सर्दी-खांसी से अलग है और इसके लक्षण कॉमन कोल्ड जैसे दिखाई देते हुए भी कहीं ज्यादा सीवियर हैं. यहां तक कि कुछ मरीजों को मरीजों को सांस लेने में दिक्कत भी झेलनी पड़ रही हैं. इसे लेकर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने हर एक सवाल का जवाब दिया है. आइए जानते हैं..

सवाल- एनसीआर में कौन से वायरस के मामले आ रहे हैं?

जवाब- दिल्ली-एनसीआर में इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के मामले सामने आ रहे हैं. इसके लक्षण और सीवियेरिटी कॉमन कोल्ड से अलग हैं. लक्षणों को देखकर संभावना जताई जा रही है कि ये केसेज इन्फ्लूएंजा ए के स्ट्रेन H3N2 की वजह से हो सकते हैं. हालांकि इसे लेकर कोई आधि‍कार‍िक डेटा उपलब्‍ध नहीं है.

सवाल- H3N2 स्ट्रेन को हांग कांग फ्लू भी कहते हैं, क्‍यों?
जवाब- एचथ्रीएनटू (H3N2) वायरस इन्फ्लूएंजा ए वायरस का ही सबटाइप है. यह सबसे पहले साल 1968 में हांग कांग महामारी के दौरान इंसानों में पाया गया था. इसके बाद से वायरस का यह स्ट्रेन पूरी दुनिया में हर साल मौसमी फ्लू के रूप में फैलता रहता है. भारत में फिलहाल यह इन्फ्लूएंजा के एचवनएनवन (H1N1) स्ट्रेन और इन्फ्लूएंजा बी के साथ मिलकर सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला वायरस म्यूटेंट है.

इन्‍फ्लूएंजा के लक्षण कॉमन कोल्‍ड से अलग हैं.

सवाल- किस मौसम में फैलता है?
जवाब- यह भारत में आमतौर पर मौसम बदलने पर फैलता है. जब भी मॉनसून के बाद सर्दी का मौसम आता है तो देशभर में इन्फ्लूएंजा वायरस के मरीज सामने आते हैं.

सवाल – यह एक-दूसरे में कैसे फैलता है?
जवाब- यह एक संक्रामक बीमारी है और एक मरीज से दूसरे में खांसने, छींकने और नजदीकी संपर्क से फैलता है.

सवाल- क्या हैं इसके लक्षण?
जवाब- इसमें मरीज को अचानक बुखार आता है, ठंड लगती है. सर्दी-खांसी होती है, गला दुखता है. नाक बहती है, शरीर व सिर में दर्द और थकान होती है.कुछ लोगों में डायरिया और उल्टी के लक्षण भी होते हैं.

सवाल- फ्लू कितने दिन में होता है ठीक
जवाब- फ्लू अचानक होता है और सीवियर होता है. अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. यह 1 से 2 हफ्तों में ठीक हो जाता है. जबकि सामान्य कोल्ड 5-7 दिन में ठीक हो जाता है और खुद तक ही सीमित होता है, इससे और लोगों को संक्रमण नहीं होता.

सवाल-किन लोगों को ज्यादा खतरा?
जवाब- इससे सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग, छोटे बच्चे और वे लोग होते हैं जिन्हें क्रॉनिक बीमारियां जैसे डायबिटीज, हार्ट, फेफड़े, किडनी या लिवर संबंधी दिक्कतें होती हैं.

H3N2 इन्फ्लूएंजा वायरस अलर्ट
एच 3 एन 2 फ्लू में तेज बुखार आता है और गले में दर्द, सर्दी खांसी होती है.

सवाल- इससे बचाव के क्या उपाय हैं?
जवाब- इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए हर साल वैक्सीन लगवाना जरूरी है. यह फ्लू के बदलते स्ट्रेंस पर भी कारगर है. इसके साथ ही बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोना, मास्क पहनना, खांसी और सर्दी होने पर मुंह और नाक को ढकना, बीमार लोगों को आइसोलेशन में रखना भी बचाव के लिए जरूरी हैं.

सवाल. डॉक्टर के पास जाने की कब जरूरत पड़ती है?
जवाब- अगर सांस लेने में दिक्कत होती है और सीने में दर्द होता है. लगातार तेज बुखार रहता है. कन्फ्यूजन होता है, दौरे पड़ते हैं, बेहोशी रहती है, बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी, शरीर में पानी की कमी हो जाती है और पुरानी क्रॉनिक बीमारियां फिर से उभरने लगें तो इसमें मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ती है.

सवाल- क्या इन्फ्लूएंजा वैक्सीन कारगर है?
जवाब- सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन उस सीजन के सभी इन्फ्लूएंजा वायरस स्ट्रेनों के खिलाफ कारगर है. इनमें इन्फ्लूएंजा ए वायरस के दो स्ट्रेन H1N1 और H3N2 के अलावा इन्फ्लूएंजा बी पर असरदार है. इस वैक्सीन को दो तरह से लगवाया जा सकता है, इन्जेक्शन के माध्यम से और इन्ट्रा नेजल तरीके से.

सवाल – वैक्सीन कब लगवानी चाहिए?
जवाब- इस वैक्सीन को सितंबर में लगवाना चाहिए. जब मॉनसून के बाद सर्दी का मौसम आने वाला होता है और यह फ्लू फैलता है.

सवाल – इस वैक्सीन को हर साल लगवाना क्यों जरूरी है?
जवाब- इन्फ्लूएंजा वायरसों को बार बार म्यूटेशन के लिए जाना जाता है और इसीलिए तेजी से बढ़ने वाला स्ट्रेन हर साल बदल जाता है. ऐसे में हर साल नए आने वाले उस स्ट्रेन के भी खिलाफ काम करने वाली इम्यूनिटी की जरूरत पड़ती है.डब्ल्यूएचओ और राष्ट्रीय एजेंसियां साल में दो बार सर्विलांस डाटा को रिव्यू करती हैं और जरूरत के अनुसार नई वैक्सीन कंपोजिशन की सिफारिश करती हैं.

इन्‍फ्लूएंजा की वैक्‍सीन हर साल लगवानी होती है.
इन्‍फ्लूएंजा की वैक्‍सीन हर साल लगवानी होती है.

सवाल- क्या वैक्सीनेशन के बाद भी फ्लू हो सकता है?
जवाब- क्योंकि वायरस में म्यूटेशन होता है तो कोई भी स्ट्रेन संक्रमण कर सकता है. ऐसे में फ्लू होना संभव है लेकिन वैक्सीन लगने के बाद रोग के लक्षण माइल्ड हो सकते हैं और रोग की गंभीरता घट जाती है. ऐसे लोगों को अस्पताल में भर्ती होने, आईसीयू की जरूरत पड़ने या मौत की संभावना घट जाती है.

सवाल- इस वैक्सीन को कौन लगवा सकता है?
जवाब- सीडीसी और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार इस वैक्सीन को 6 महीने से 5 साल के बच्चे और 65 या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, प्रेग्नेंट महिलाएं, हेल्थकेयर वर्कर्स, क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को लगवाना चाहिए.



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