हार्ट अटैक का खतरा 31% तक होगा कम! डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान साबित होगी यह नई दवा

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क्या इवोलोकुमैब पहले दिल के दौरे को रोक सकता है: दिल की बीमारियां आज भी दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं. अक्सर लोग तब इलाज शुरू करते हैं, जब हालत गंभीर हो चुकी होती है, जैसे धमनियों में ब्लॉकेज या हार्ट अटैक के बाद. लेकिन अब नई रिसर्च इशारा कर रही है कि अगर इलाज पहले और ज्यादा प्रभावी तरीके से शुरू किया जाए, तो इन खतरों को पहले ही रोका जा सकता है.

हार्ट से जुड़ी दिक्कत को कम किया जा सकता है

अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिगहम  की एक नई स्टडी, जो JAMA में पब्लिश हुई और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के सालाना साइंटिस्ट सत्र में पेश की गई, उसमें बताया गया कि इवोलोक्यूमैब नाम की दवा हाई-रिस्क डायबिटीज मरीजों में दिल से जुड़ी पहली बड़ी घटना के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. भले ही उनमें अभी  आर्टरीज की बीमारी के साफ संकेत न हों.

क्यों बढ़ता है खतरा

हमारा हार्ट शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए साफ और खुली ब्लड वेसल्स पर निर्भर करता है. लेकिन समय के साथ आर्टरीज की दीवारों में प्लाक नाम का पदार्थ जमा होने लगता है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. जब यह जमाव बढ़ जाता है, तो ब्लड फ्लो रुक सकता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इस प्रक्रिया के पीछे एक बड़ा कारण एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल होता है. लंबे समय से डॉक्टर इसे कम करने के लिए स्टैटिन दवाओं का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. हालांकि ये दवाएं असरदार हैं, लेकिन हाई-रिस्क मरीजों में हमेशा पर्याप्त कमी नहीं ला पातीं.

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नए विकल्प आते हैं

यहीं पर इवोलोक्यूमैब जैसे नए विकल्प सामने आते हैं. यह एक पीसीएसके9 इनहिबिटर दवा है, जो स्टैटिन से अलग तरीके से काम करती है और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को लगभग 60 प्रतिशत तक कम कर सकती है. अब तक इसका उपयोग मुख्य रूप से उन मरीजों में किया जाता था, जिन्हें पहले से दिल की बीमारी हो. इस स्टडी में यह जांचा गया कि क्या इस दवा का इस्तेमाल पहले से, यानी बीमारी के गंभीर होने से पहले, किया जाए तो क्या यह दिल की समस्याओं को रोक सकती है. इसके लिए 3,655 हाई-रिस्क डायबिटीज मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें लंबे समय से डायबिटीज, इंसुलिन पर निर्भरता या छोटी ब्लड वेसल्स में नुकसान जैसी स्थितियां थीं, लेकिन एथेरोस्क्लेरोसिस के स्पष्ट संकेत नहीं थे.

करीब एक साल बाद नतीजे सामने आए कि इवोलोक्यूमैब लेने वालों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल लगभग 51 प्रतिशत तक कम हो गया.  लेकिन असली असर लंबे समय में दिखा. करीब पांच साल के फॉलो-अप में पाया गया कि इस दवा का इस्तेमाल करने वालों में पहली बार हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल से जुड़ी मौत का खतरा 31 प्रतिशत तक कम था.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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