प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को शिर्डी और कोपरगांव में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच के दायरे में शिर्डी स्थित होटल ‘मैरीगोल्ड’ के मालिक निलेश भानुसाहेब जापे हैं, जिनका नाम कथित तौर पर भोंदू बाबा अशोक खरात से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में सामने आया है.
ED की टीमों ने सुबह कोपरगांव के MIDC इलाके में स्थित जापे की टेक्सटाइल यूनिट पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया. इसके बाद शिर्डी में होटल मैरीगोल्ड और जापे के आवास पर एक साथ छापेमारी की गई. इस दौरान अधिकारियों ने जापे से पूछताछ कर खरात से जुड़े लेन-देन के बारे में जानकारी जुटाई.
यह कार्रवाई खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके से हुई पूछताछ के बाद तेज हुई. बावके फिलहाल अहिल्यानगर जिले की कोपरगांव उपजेल में न्यायिक हिरासत में है. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत विशेष अदालत की अनुमति लेकर 21 और 22 अप्रैल को जेल में ही उससे पूछताछ की थी. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान होटल कारोबार से जुड़े एक संदिग्ध मनी ट्रेल के अहम सुराग मिले.
जांच में क्या हुआ है खुलासा
जांच में सामने आया है कि खरात ने पिछले साल शिर्डी में जमीन सौदे के लिए जापे को करीब 15 करोड़ रुपये नकद दिए थे. यह रकम ब्याज पर दी गई थी और शर्त थी कि यदि सौदा नहीं होता तो रकम मोटे ब्याज के साथ लौटाई जाएगी. वहीं, सौदा पूरा होने पर खरात को प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी मिलनी थी.
हालांकि, यह जमीन सौदा पूरा नहीं हो सका, लेकिन हैरानी की बात यह है कि खरात ने न तो पैसे वापस मांगे और न ही किसी तरह का ब्याज लिया. ऐसे में जांच एजेंसियों को शक है कि इस रकम के जरिए शिर्डी के होटल सेक्टर में मनी लॉन्ड्रिंग की गई हो.
इस एंगल से जांच में जुटी है ईडी
ED अब यह जांच कर रही है कि जापे के कारोबार का इस्तेमाल कहीं अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए तो नहीं किया गया. एजेंसी ने जापे को बयान दर्ज कराने के लिए मुंबई स्थित अपने कार्यालय में तलब किया है.
गौरतलब है कि इससे पहले ED खरात से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों का नेटवर्क नासिक, पुणे और सोलापुर में खंगाल चुकी है. अब शिर्डी-कोपरगांव के होटल सेक्टर की जांच इस मामले में एक नए एंगल की ओर इशारा कर रही है, जहां और भी कारोबारी कड़ियों की तलाश की जा रही है.
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