“चिंगारी कोई भड़के” क्लासिक बॉलीवुड फिल्म “अमर प्रेम” का एक सुंदर और भावपूर्ण गीत है, जो 1972 में रिलीज़ हुई थी। इस गाने को महान पार्श्व गायक किशोर कुमार ने गाया था, उस्ताद आरडी बर्मन ने इसे संगीतबद्ध किया था और आनंद बख्शी ने इसके दिल छू लेने वाले गीत लिखे थे। फिल्म: अमर प्रेम (1972) गाना: चिंगारी कोई भड़के गायक: किशोर कुमार संगीत निर्देशक: आरडी बर्मन गीतकार: आनंद बख्शी “चिंगारी कोई भड़के” फिल्म के सबसे यादगार गीतों में से एक है और किशोर कुमार द्वारा अपनी भावनात्मक गहराई और मार्मिक प्रस्तुति के लिए आज भी लोकप्रिय है। शक्ति सामंत द्वारा निर्देशित फिल्म “अमर प्रेम” अपनी दिल को छू लेने वाली कहानी और उल्लेखनीय संगीत के लिए जानी जाती है, और यह गाना निस्संदेह इसका मुख्य आकर्षण है। #चिंगारीकोईभाडके #अमरप्रेम #किशोरकुमार #आरडीबर्मन #आनंदबख्शी #ओल्डबॉलीवुड #क्लासिकसॉन्ग #सोलफुलमेलोडी #एवरग्रीनम्यूजिक #नॉस्टैल्जिकट्यून्स लिरिक्स (हिंदी) : शिंगारी कोई बढ़ा, तो उसे बोलाये सावन जो अगन लगाए, उसे कौन उड़ाये, ओ… उसे कौन भगाये पतझड़ जो बाग उजाड़े, वो बहार खिलाये जो बहार उजड़े में, कौन खाये ओ… उसे कौन कहे तो, मंदिर की बात नहीं है – (2) ये किस्सा है मंदिर का कोई दोस्त है जगह, तो मिट गया बहलाये मन मिट जो घाव रखता है, उसे कौन खाए न जाने क्या हो जाता है, जाने हम क्या कर जाते हैं – (2) तो जिंदा हैं, उसे तो मर जाए दुनिया जो प्यासा है, तो उसने जो बनाया उसे बनाया, उसे किसने खाया ओ… उसे कौन बनाया माना तुफाँ के आगे, नहीं जगाए किसीका – (2) मौजों का दोष नहीं है, ये दोष है और किसी का माझी जो नाव दबाये, उसे कौन बचाये ओ… उसे कौन बचाये चिंगारी… Lyrics (अंग्रेजी) चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये सावन जो अगन लगायें, उसे कौन बुझाये? पतझड़ जो बाग उजाड़े, वो बाग बहार खिलाये जो बाग बहार में उजाड़े, उसे कौन खिलाये? हमसे मत पूछो कैसे, मंदिर टूटा सपनों का लोगो की बात नहीं है, ये किस्सा है अपनों का कोई दुश्मन ठेस लगाए, तो मिट जिया बहलाए मन-मित जो घाव लगाए, उसे कौन मिटाए? ना जाने क्या हो जाता, जाने हम क्या कर जाते पीते हैं तो जिंदा है, ना पीते तो मर जाते दुनिया जो प्यासा रखे, तो मदिरा प्यास बुझाये मदिरा जो प्यास लगाये, उसे कौन बुझाये? कौन बुझाये का प्रयोग करें? मन तूफ़ान के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का मौजो का दोष नहीं है, ये दोष है और किसी का मज़दूर में नैया डोले, तो माझी पार लगायें माझी जो नाव डुबॉय, उसे कौन बचाये? ओ यूज़ कौन बचाये?
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