भाजपा नेत्री कोम्पेला माधवी लता की फोटो पर सेक्सी लिखने वाले चीफ प्रॉक्टर को लेकर हुए भारी हंगामे के बाद अब समाजवादी छात्र सभा भी कूद पड़ी है। छात्र सभा आज SSP को लिखित शिकायत कर एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर मुकदमा लिखाने की मांग करेगी। दरअसल बरेली कॉलेज में बुधवार को उस समय रणक्षेत्र जैसी स्थिति बन गई थी जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता प्राचार्य कार्यालय में घुस गए थे। मामला चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आलोक खरे द्वारा भाजपा नेत्री कोम्पेला माधवी लता की फोटो पर की गई अमर्यादित टिप्पणी से जुड़ा था। उग्र छात्र-छात्राओं ने प्रिंसिपल ऑफिस का घेराव कर नारेबाजी की और प्रॉक्टर के साथ धक्का-मुक्की की। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि छात्राएं प्रॉक्टर को मारने के लिए आगे बढ़ीं, जिसके बाद उन्हें स्टाफ के पीछे छिपकर जान बचानी पड़ी। प्रॉक्टर पद से छुट्टी और नई नियुक्ति
हालात बेकाबू होते देख प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश राय ने तत्काल कड़ा फैसला लिया। उन्होंने प्रोफेसर आलोक खरे को चीफ प्रॉक्टर के पद से कार्यमुक्त कर दिया और पूरी प्रॉक्टोरियल टीम को भंग करने का आदेश जारी कर दिया। उनकी जगह वरिष्ठ प्रोफेसर इंदिवर सिंह चौहान को कॉलेज का नया चीफ प्रॉक्टर नियुक्त किया गया है। प्राचार्य के इस लिखित आदेश के बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए और धरना समाप्त किया। आलोक खरे का पलटवार और कार्रवाई की मांग
पद से हटाए जाने के बाद अब यह मामला नया मोड़ ले चुका है। गुरुवार को पूर्व चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे ने प्राचार्य को पत्र लिखकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के नाम पर उनके साथ अभद्रता और हाथापाई की गई है। खरे ने प्राचार्य से मांग की है कि ऑफिस में घुसकर हंगामा करने वाले और हमला करने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। वही उन्होंने कहा कि उन्हें पद से चीफ प्रॉक्टर पद से हटाया नहीं गया बल्कि उन्होंने 30 मार्च को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। विवाद की जड़: वो फेसबुक पोस्ट
विवाद की शुरुआत 19 मार्च को हुई थी। 62 वर्षीय बॉटनी प्रोफेसर आलोक खरे ने फेसबुक पर माधवी लता की भगवा भेष वाली फोटो साझा करते हुए लिखा था कि केवल बाबा ही नहीं, बाबी (साध्वी) भी कम सेक्सी नहीं होतीं। एबीवीपी का तर्क है कि जहां एक ओर देश नवरात्रि में नारी शक्ति की पूजा कर रहा था, वहीं एक जिम्मेदार शिक्षक ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। हालांकि, खरे ने सफाई दी कि उन्होंने हाल ही में गिरफ्तार हुए अशोक खरात के संदर्भ में यह पोस्ट की थी और बाद में इसे हटा भी लिया था। प्रोफेसर आलोक खरे के खिलाफ दर्ज हो FIR- एबीवीपी
एबीवीपी के महानगर सह मंत्री प्रिंस यादव ने कहा कि एक बड़े शिक्षण संस्थान में इतने उच्च पद पर बैठा व्यक्ति महिलाओं के लिए अशोभनीय टिप्पणी करता है। जो बहुत ही निंदनीय है। हम लोगों ने इसीलिए बरेली कॉलेज में प्राचार्य को ज्ञापन दिया था। जिसके बाद आलोक खरे को चीफ प्रॉक्टर के पद से हटा दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि नवरात्र में जब पूरा देश मां दुर्गा की आराधना करता है उस समय इस तरह की टिप्पणी करना बहुत अशोभनीय है। उन्होंने कहा कि बरेली कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ती है वो अपने आप को असहज महसूस कर रही है। एबीवीपी ने चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ एफआईआर की मांग की है। 35 साल का करियर और विवादों का नाता
प्रोफेसर आलोक खरे का शैक्षणिक सफर साढ़े तीन दशक पुराना है। 1984 में लखीमपुर खीरी के वाई.डी. कॉलेज से स्नातक करने वाले खरे ने वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की है। बरेली कॉलेज आने से पहले वह सीतापुर के सेक्रेड हार्ट डिग्री कॉलेज में तैनात थे। वह रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अधिकृत रिसर्च सुपरवाइजर भी हैं। हालांकि, वह अक्सर अपनी फेसबुक पोस्ट और सरकार विरोधी रुख के कारण चर्चा और विवादों में बने रहते हैं। 189 साल पुराना गौरवशाली इतिहास
जिस बरेली कॉलेज में यह विवाद हुआ, उसकी नींव 1837 में रुहेलखंड के तत्कालीन कमिश्नर मिस्टर कॉनली के प्रयासों से पड़ी थी। 1857 की क्रांति के दौरान यहां के प्राचार्य डॉ. कारलोस बक की हत्या कर दी गई थी और कॉलेज बंद हो गया था। बाद में जयपुर के राजा जगत सिंह और नवाब रामपुर द्वारा दी गई 110 एकड़ भूमि के सहयोग से इस संस्थान का पुनर्जन्म हुआ। आज यह रुहेलखंड विश्वविद्यालय का सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज है, जिसने देश को कई बड़े राजनेता और नौकरशाह दिए हैं।
Source link