हलफनामे में लापरवाही पर हाईकोर्ट ने पुलिस फटकारा: अग्रिम जमानत याचिका खारिज, बोला- गलत स्टेटस रिपोर्ट से भटक सकता है न्याय – Chandigarh News

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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गलत और लापरवाह स्टेटस रिपोर्ट व हलफनामे दाखिल करने को लेकर पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की चूकें न केवल न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह कर सकती हैं, बल्कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी गंभीर खतरे में डाल सकती हैं। आदेश के अंत में हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में अदालतों में दाखिल होने वाली सभी स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामे समुचित रिकॉर्ड जांच और विवेकपूर्ण सत्यापन के बाद ही पेश किए जाएं।
अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के निर्देश देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। जस्टिस मंदीप पन्नू ने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि अदालत में दी जाने वाली हर स्टेटस रिपोर्ट और हर हलफनामा पूरी तरह जांच-परख कर ही दाखिल किया जाए। बिना रिकॉर्ड ठीक से देखे कोई जानकारी अदालत में नहीं दी जानी चाहिए, ताकि कोर्ट के सामने सही और जिम्मेदारी से भरे तथ्य रखे जा सकें। अग्रिम जमानत मामले में गलत जानकारी यह टिप्पणी एक अग्रिम जमानत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई। मामले में एक पुलिस अधिकारी ने अदालत को यह जानकारी दी कि याचिकाकर्ता किसी अन्य एफआईआर में दोषी है, जबकि हकीकत यह थी कि वह उसी मामले में शिकायतकर्ता था। पुलिस अधिकारी के इस कथित गलत बयान के आधार पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि शपथ पर दिया गया यह गलत बयान जानबूझकर दिया गया था, ताकि उसके मामले को नुकसान पहुंचाया जा सके। राज्य सरकार बोली अनजानी गलती राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यह एक अनजानी गलती थी और इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं थी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कथित गलत जानकारी का मामले के अंतिम निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ा, क्योंकि याचिकाकर्ता को पहले अंतरिम अग्रिम जमानत दी गई थी, जिसे बाद में स्थायी रूप से मंजूर कर लिया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस पन्नू ने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि गलत स्टेटस रिपोर्ट के बावजूद याचिकाकर्ता को राहत मिल चुकी है। अदालत ने माना कि यह कथित गलत बयान फैसले का आधार नहीं बना और इससे न तो न्यायिक प्रक्रिया बाधित हुई और न ही याचिकाकर्ता को कोई वास्तविक नुकसान हुआ। लापरवाह हलफनामे किसी भी हाल में अस्वीकार्य हालांकि, कोर्ट ने यह भी दो टूक कहा कि पुलिस अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे अदालत में तथ्य रखते समय अत्यंत सावधानी, परिश्रम और जिम्मेदारी दिखाएं, खासकर उन मामलों में जहां किसी व्यक्ति की आजादी दांव पर लगी हो।
अदालत ने कहा कि गलत या लापरवाह हलफनामे, भले ही अनजाने में दाखिल किए गए हों, अदालत को गुमराह कर सकते हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में टालना चाहिए।



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