Hazaribagh ACB Action: झारखंड: DMFT योजनाओं में कमीशनखोरी का खेल, 2 प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंता चढ़ें ACB के हत्थे

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Hazaribagh ACB Action, हजारीबाग (आरिफ की रिपोर्ट): झारखंड के हजारीबाग स्थित जल संसाधन विभाग के जनपथ प्रमंडल संख्या-दो के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो को रिश्वत लेते भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा रंगेहाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. गिरफ्तार अभियंता की रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे हजारीबाग जलपथ प्रमंडल की मुख्य जिम्मेदारी के साथ-साथ बरही प्रमंडल के प्रभारी कार्यपालक अभियंता (Additional Charge) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे. उनकी गिरफ्तारी ने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर कर दिया है.

कई जिलों की महत्वपूर्ण योजनाओं पर मंडराया संकट

जल संसाधन विभाग हजारीबाग के अलावा चतरा, कोडरमा, रामगढ़ तथा गिरिडीह और बोकारो के कुछ हिस्सों में जल स्रोत से जुड़ी बड़ी और महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी जिम्मेदार है. यह एक विशाल कार्यक्षेत्र है, जहां करोड़ों की योजनाएं चल रही हैं. इसके बावजूद, पिछले दो वर्षों से जनपथ प्रमंडल संख्या-दो में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) योजना के कार्यान्वयन में भारी अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं. राहुल कुमार मालतो की गिरफ्तारी इन आरोपों को और पुख्ता कर रही है.

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संवेदकों ने पारदर्शिता पर उठाए थे सवाल, नियमों की धज्जियां उड़ी

बताया जाता है कि करीब छह माह पूर्व बरही प्रमंडल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता भास्कर दास के रांची स्थानांतरण के बाद राहुल कुमार मालतो को यहां का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था. इस दौरान कई संवेदकों ने योजनाओं के आवंटन में पारदर्शिता (Transparency) नहीं होने की लिखित और मौखिक शिकायतें की थीं. आरोप है कि नियमों और प्रक्रियाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर एक ही पसंदीदा संवेदक ( ठेकेदार) को पिछले दो वर्षों में दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण योजनाएं दी गईं, जिससे भारी सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ है.

कमीशनखोरी का मकड़जाल, जांच हुई तेज

पूरे मामले को ‘कमीशनखोरी’ के गहरे मकड़जाल से जोड़कर देखा जा रहा है. एसीबी की इस त्वरित कार्रवाई में केवल कार्यपालक अभियंता ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगी सहायक अभियंता चिरंजीव दांगी की गिरफ्तारी के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है. यह स्पष्ट है कि यह भ्रष्टाचार केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि विभागीय सिंडिकेट का हिस्सा था. एसीबी की कार्रवाई के बाद अब विभागीय स्तर पर भी इस पूरे प्रकरण की जांच तेज कर दी गई है और कई अन्य फाइलों को खंगाला जा रहा है.

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