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Bhojpur News: आम खाने के बाद गुठलियां मत फेंकिए, इनसे भी आमदनी की जा सकती है. इस योजना के तहत नर्सरी वाले खुद आपके घर से गुठली लेकर जाएंगे और उसके बदले आपको तय कीमत चुकाएंगे.
हाइलाइट्स
- आम खाइए और गुठली बेचिए.
- नर्सरी को कॉल करिए, गुठली लेने घर आएंगे.
- 5 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गुठली का दाम मिलेगा.
भॉकअप। आम के आम, गुठलियों के दाम! यह कहावत अब भोजपुर में सच हो रही है. बिहार में पहली बार ये जिला इसका सशक्त उदाहरण बनने जा रहा है. अब आम खाने के बाद बची गुठलियों को मत फेंकिए, इन्हें बेचिए और प्रति किलो 5 रुपये पाइए. बिहार में पहली बार आम की गुठली ₹5 प्रति किलो के हिसाब से खरीदी जा रही है. इन गुठलियों से पौधे तैयार कर बड़े स्तर पर जैविक आम के बाग लगाए जाएंगे. इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलेगी, फिलहाल इससे 50 लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है.
रोटरी क्लब नर्सरी के संचालक कौशल सिंह और उनके भतीजे किशन ने बताया कि आम की गुठली को जमीन में गाड़कर ‘मौला’ निकाला जाएगा. इसके बाद इस ‘मौला’ को पॉलीथिन पैकेट में डालकर ग्राफ्टिंग (कलम) की जाएगी. ग्राफ्टिंग के बाद इसे खेतों में रोपकर आम के पौधे तैयार किए जाएंगे. लगभग डेढ़ साल के अंदर पौधे पूरी तरह तैयार हो जाएंगे. इस पूरी प्रक्रिया में रासायनिक खाद या दवाइयों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जिससे पौधे पूरी तरह से जैविक होंगे.
आपके घर से गुठली ले जाएंगे!
मुख्यमंत्री बागवानी मिशन, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, मनरेगा और भूमि संरक्षण जैसी सरकारी योजनाओं के तहत भी इसे बढ़ावा दिया जाएगा. इससे जिले में बड़े स्तर पर जैविक आम की खेती संभव होगी. नर्सरी संचालक कौशल कुमार ने बताया कि इच्छुक लोग आम खाने के बाद बची गुठलियों को इकट्ठा कर सकते हैं. सिर्फ एक फोन कॉल करने पर नर्सरी की टीम खुद घर से गुठलियां लेने पहुंच जाएगी. इसके बदले ₹5 प्रति किलो के हिसाब से तुरंत भुगतान किया जा रहा है. संपर्क करने के लिए नंबर ये है – 9110962325.
फिलहाल 50 हजार पौधों के लिए गुठलियों की पैकिंग का काम पूरा हो चुका है. आगे भी जब तक गुठलियों की आपूर्ति मिलती रहेगी, काम जारी रहेगा. इस पहल से जिले में जैविक आम उत्पादन में नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है. इस परियोजना से नर्सरी में 50 लोगों को रोजगार मिला है. ग्राफ्टिंग, पौध रोपण, गुठली संग्रहण जैसे कामों के लिए स्थानीय युवाओं को काम दिया गया है. इस परियोजना से किसानों के बीच जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ेगी.
गुठली संग्रहण और पौधे तैयार करने के इस नए तरीके से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा. नर्सरी संचालक के अनुसार, अगले दो वर्षों में जिले के अलग-अलग इलाकों में जैविक आम के 5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है. इस पहल से महिला स्वयं सहायता समूहों को भी काम मिलेगा.